महिला आरक्षण पर विपक्षियों को भारी पड़ेगी ऐतिहासिक गलतीः रेखा आर्या 

महिला आरक्षण पर विपक्ष पर बरसीं महिला सशक्तिकरण मंत्री 
भाजपा 28 अप्रैल को दून में निकालेगी आक्रोश मशाल रैली 
देहरादून। उत्तराखंड की महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने महिलाओं के अधिकारों और आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनके अधिकार से अब कोई भी वंचित नहीं कर सकता और आधी आबादी खुद अपने अधिकार लेकर रहेंगी।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि देश में लंबे समय से महिला आरक्षण का मुद्दा चर्चा में रहा है, लेकिन हर बार विपक्षी दलों ने इसमें अड़चनें पैदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल, विशेष रूप से इंडी गठबंधन, महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में गंभीर नहीं हैं।
उनका कहना था कि जब भी महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व देने की बात आती है, तब ये दल विभिन्न बहानों के माध्यम से प्रक्रिया को धीमा करने या फिर उसे रोकने का प्रयास करते हैं। उन्होंने केंद्र की बीजेपी सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि पार्टी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
रेखा आर्य कहा कि लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का संकल्प बीजेपी ने लिया है और इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि चाहे आज हो या कल, महिला आरक्षण लागू होकर रहेगा और इसका श्रेय भी आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को ही जाएगा।
मंत्री आर्य ने 28 अप्रैल को देहरादून में प्रस्तावित आक्रोश मशाल रैली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह रैली महिलाओं के अंदर बढ़ते आक्रोश और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता का प्रतीक होगी। उनके मुताबिक, इस रैली में काफी संख्या में महिलाएं भाग लेंगी और ये साफ संदेश देंगी कि अब वे अपने अधिकारों को लेकर चुप बैठने वाली नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आज की महिला पहले की तुलना में ज्यादा जागरूक, शिक्षित और राजनीतिक रूप से सक्रिय हो चुकी हैं।
विपक्षी दलों को भारी पड़ेगी उनकी यह ऐतिहासिक गलतीश् उनका कहना था कि यह दोहरा रवैया महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने ये भी कहा कि विपक्षी दलों की यह ऐतिहासिक गलती आने वाले चुनावों में उन्हें भारी पड़ सकती है।
उनके मुताबिक, देश और राज्य की महिलाएं अब पूरी तरह जागरूक हैं और वे यह समझ चुकी हैं कि कौन उनके अधिकारों के साथ खड़ा है और कौन नहीं? उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में महिलाएं अपने वोट के माध्यम से इसका जवाब देंगी। महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलने से लोकतंत्र होगा संतुलितरू रेखा आर्य ने जोर देकर कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता का विषय है। जब तक महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र पूरी तरह से संतुलित नहीं हो सकता।
महिलाएं अब सिर्फ वोटर नहीं
महिलाएं अब केवल वोटर के रूप में नहीं, बल्कि नीति निर्माण में भागीदार बनने के लिए आगे आ रही हैं। ऐसे में महिला आरक्षण का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने का माध्यम बनेगा। विपक्ष पर निशाना साधते हुए मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों में परिवारवाद हावी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों में एक खास परिवार की महिलाओं को तो अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक अवसर दिए जाते हैं, लेकिन आम महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलता।
महिलाओं के हित में काम कर रही सरकार
उन्होंने इसे देश के विकास से भी जोड़ा और कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीतियों में ज्यादा संवेदनशीलता और व्यापक दृष्टिकोण आएगा। साथ ही कहा कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों ही महिलाओं के हित में काम कर रही हैं। भविष्य में भी यह प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं। फिलहाल, महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। 18 अप्रैल को प्रस्तावित रैली इस मुद्दे को और ज्यादा गर्मा सकती है।

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