38 वर्षों के अनुशासन और समर्पण की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए उप कमांडेंट आजाद सिंह

केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के उप कमांडेंट आजाद सिंह ने 38 वर्षों की लंबी और सेवा के बाद सेवानिवृत्ति ली। वर्ष 1988 में आरक्षक के रूप में भर्ती हुए आजाद सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण की मिसाल पेश की।
खेलों में भी उनका प्रदर्शन राष्ट्रीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक उल्लेखनीय रहा, जहाँ उन्होंने कुश्ती में कई पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 1987 जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप (दिल्ली) में स्वर्ण पदक,1989 सेफ गेम इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में कांस्य पदक,1991 ऑल इंडिया पुलिस गेम्स (पटना) में स्वर्ण, 1992 सीनियर नेशनल (भीलवाड़ा) में स्वर्ण, 1992 ऑल इंडिया पुलिस गेम (भोपाल) में स्वर्ण, 1993 ऑल इंडिया पुलिस गेम (लखनऊ) में स्वर्ण तथा 1993 वर्ल्ड पुलिस फायर गेम्स (कोलोराडो, अमेरिका) में फ्रीस्टाइल व ग्रीक-रोमन में दो स्वर्ण पदक हासिल किए।
सेवा के दौरान उन्हें कई बार प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया गया और वर्ष 2026 में राष्ट्रपति पुलिस सराहनीय सेवा पदक से भी नवाज़ा गया। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने कहा, “फौज में जब भर्ती होते हो तो जवान ही जाना है, बूढ़ा होकर नहीं।” उन्होंने कर्म की महत्ता पर जोर देते हुए कहा, “कर्म ही प्रधान है, अच्छे कर्म करो भगवान खुद रास्ता दिखाते हैं,” और सभी को रोज़ 1दृ1.5 घंटे अपने स्वास्थ्य के लिए निकालने की सलाह दी।
इस अवसर पर कमांडेंट दीपक कुमार बडोला, असिस्टेंट कमांडेंट (फायर) एस.एस. धाकड़ सहित कई अधिकारी और जवान उपस्थित रहे।

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