सचिवालय कूच के दौरान कर्मचारियों व पुलिस से हुई धक्का-मुक्का
देहरादून। सोमवार को अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश भर से देहरादून पहुंचे मिनिस्टीरियल कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। सबसे पहले उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ़ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के बैनर तले भारी संख्या में कर्मचारी परेड ग्राउंड में एकत्रित हुए। इसके बाद सभी पैदल मार्च निकालते हुए सचिवालय घेराव करने निकले, लेकिन पहले से ही मौजूद भारी पुलिस बल ने सभी को सचिवालय से पहले सुभाष रोड पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
इस दौरान आगे बढ़ाने को लेकर मिनिस्टीरियल कर्मचारियों और पुलिस के बीच जमकर धक्का मुक्की हुई। हालांकि जब प्रदर्दनकारियों को आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने सड़क पर ही अपना धरना शुरू कर दिया। प्रदर्दनकारियों ने साफ किया है कि जब तक उनकी लंबित मांगों के समाधान पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक सरकार के खिलाफ उनका धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
संगठन के प्रांतीय महामंत्री राकेश सिंह रावत ने बताया कि वे बीते डेढ़ साल से अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर उत्तराखंड शासन से बार-बार वार्ता कर रहे हैं, लेकिन जिन मांगों पर सहमति बनी, उन पर भी आज तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ। आज मजबूर होकर कार्मिकों को आंदोलन करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लेकर कर्मचारियों ने उत्तराखंड शासन को पूरा समय दिया, उसके बावजूद उनकी मांगों को अनसुना किया गया। मिनिस्टीरियल कर्मचारियों ने मांग उठाई कि कनिष्ठ सहायक का ग्रेड वेतन लेवल 5 अनुमन्य करते हुए प्रधान सहायक और प्रशासनिक अधिकारी के पद को समाहित करते हुए पदनाम प्रशासनिक अधिकारी का पद सृजित किया जाए।
इसके अलावा जिन विभागों में पदोन्नति नहीं हो रही है, वहां पदोन्नति एसीपी की व्यवस्था लागू की जाए। जिन विभागों में मिनिस्टीरियल के पदों का पुनर्गठन नहीं हुआ है, वहां जल्द से जल्द पुनर्गठन कराया जाए। राज्य के 80 प्रतिशत कार्मिक सरकारी सेवा में होने के कारण पुरानी पेंशन योजना से वंचित है। इसलिए कार्मिकों के हितों में पुरानी पेंशन बहाली के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाए। कर्मचारियों ने गोल्डन कार्ड में आ रही असुविधा को भी तत्काल समाप्त किए जाने की भी मांग उठाई है।