पौड़ी में शिक्षा के लिए बच्चे ने मिलने के कारण 40 सरकारी स्कूलों पर लटके ताले
बंद होने वाले स्कूलों में 32 प्राथमिक व 8 उच्च प्राथमिक विद्यालय
बीरोंखाल विकासखंड में सबसे ज्यादा 5 स्कूल बंद
पौड़ी। पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन और गांवों में घटती आबादी का असर अब सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है। कभी बच्चों की चहल-पहल से गुलजार रहने वाले सरकारी स्कूलों में अब सन्नाटा पसरा है। आलम ये है कि छात्र संख्या शून्य होने की वजह से कई स्कूलों में ताले लटक गए हैं। पौड़ी जिले में भी नए शैक्षणिक सत्र में छात्र संख्या शून्य होने के कारण 40 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को बंद करना पड़ा है। इनमें 32 प्राथमिक और 8 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं।
पौड़ी जिले के तमाम गांवों में बच्चों की घटती संख्या और परिवारों के पलायन ने सरकारी स्कूलों के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पौड़ी जिले में कुल 1,297 प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से 32 विद्यालय ऐसे हैं, जहां नए शैक्षणिक सत्र में एक भी बच्चे ने प्रवेश नहीं लिया। वहीं, जिले के 231 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 8 में छात्र संख्या शून्य दर्ज की गई। इसके चलते जिले के विभिन्न विकासखंडों में कुल 40 विद्यालय बंद हो चुके हैं।
छात्र संख्या शून्य होने से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में जिले के कई विकासखंडों में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं विकासखंडवार उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पौड़ी, यमकेश्वर और बीरोंखाल में 5-5 विद्यालय बंद हुए हैं। एकेश्वर, कल्जीखाल, थलीसैंण और पाबौ में 3-3, जबकि, द्वारीखाल, कोट, पोखड़ा, दुगड्डा और जयहरीखाल में 2-2 विद्यालय बंद हुए हैं। खिर्सू, रिखणीखाल और नैनीडांडा में 1-1 विद्यालय में ताला लगा है।
प्राथमिक विद्यालयों की बात करें तो बीरोंखाल विकासखंड में सबसे ज्यादा 5 स्कूल बंद हुए हैं। पौड़ी और यमकेश्वर में 4-4, जबकि एकेश्वर, द्वारीखाल, कोट, कल्जीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पोखड़ा और दुगड्डा में 2-2 प्राथमिक विद्यालय बंद हुए हैं। खिर्सू, जयहरीखाल और नैनीडांडा में 1-1 प्राथमिक विद्यालय बंद हुआ है। वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर पर एकेश्वर, यमकेश्वर, कल्जीखाल, रिखणीखाल, थलीसैंण, पाबौ, पौड़ी और जयहरीखाल विकासखंड में 1-1 विद्यालय बंद हुआ है।
उन विद्यालयों के नाम जिनमें लटके ताले
शिक्षा विभाग के मुताबिक, एकेश्वर विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय डियूल्ड, पुसोली और उच्च प्राथमिक विद्यालय चौड़खाल बंद हुए हैं। यमकेश्वर में प्राथमिक विद्यालय पलेलगांव, पैंया, उमड़ा और नांद के साथ उच्च प्राथमिक विद्यालय चोपड़ा कस्याली बंद हुआ है। द्वारीखाल में प्राथमिक विद्यालय घंडालू और खेड़ा, जबकि बीरोंखाल में प्राथमिक विद्यालय तनकिला, गाडखर्क, रतकोट, सुंदरखाल और चौंडी बंद हुए हैं। कोट विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय सैंज और कंडोला में ताले लगे हैं। कल्जीखाल में प्राथमिक विद्यालय बूंगा-दो और बलोद और उच्च प्राथमिक विद्यालय पलाई बंद हुआ है। खिर्सू में प्राथमिक विद्यालय मुसोली, जबकि थलीसैंण में प्राथमिक विद्यालय खरकासारी, कुवाखर्क और उच्च प्राथमिक विद्यालय कांडई बंद हुआ है।
रिखणीखाल में उच्च प्राथमिक विद्यालय मेलधार, पाबौ में प्राथमिक विद्यालय कोटा और कलुण व उच्च प्राथमिक विद्यालय कुई बंद हुए हैं। पोखड़ा में प्राथमिक विद्यालय चमनाऊ और पोखड़ा बंद हुए हैं। पौड़ी विकासखंड में प्राथमिक विद्यालय गजेंद्रपुर, चांदखेत, डोबल्या, थपलियालगांव और उच्च प्राथमिक विद्यालय कड़ाकोट बंद हुआ है। दुगड्डा में प्राथमिक विद्यालय गढ़सिर और केष्टा, जयहरीखाल में प्राथमिक विद्यालय मोली और उच्च प्राथमिक विद्यालय रैतपुर और नैनीडांडा में प्राथमिक विद्यालय झुडंगू बंद हुआ है।
पलायन के चलते गांवों में नहीं मिल रहे बच्चे
दूरस्थ गांवों में लगातार कम होती आबादी और परिवारों के पलायन के कारण सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या बनाए रखना शिक्षा विभाग के लिए चुनौती बन गया है। कई गांवों में बच्चों की संख्या इतनी कम हो गई है कि विद्यालयों में नए प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ रहा है।
हालांकि, शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि बेहतर शैक्षणिक माहौल और गुणवत्ता आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) पौड़ी अंशुल बिष्ट का कहना है कि पौड़ी के कई गांवों में पलायन के कारण बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है। विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए गुणवत्ता पूरक शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसके तहत बीआरसी और सीआरसी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं