हंगामे के बीच 7844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट और 10 विधेयक पारित

गैरसैंण में आयोजित सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
करोड़ों खर्च होने के बाद भी प्रश्नकाल में नहीं हो सका एक भी सवाल
भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा की मांग को लेकर भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्ष

गैरसैंण। ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में उत्तराखंड विधानसभा का सत्र सियासी हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और विपक्ष के विरोध के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। बुधवार को सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने काले झंडे लहराकर, कागज फेंककर और वेल में पहुंचकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके बावजूद सदन में 7844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट और कुल 10 विधेयक पारित कर दिए गए। विपक्ष ने सत्र की अवधि बेहद कम रखने और जनहित के मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराने का आरोप लगाया। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने दोपहर बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इस तरह गैरसैंण में विधानसभा की कार्यवाही 11 घंटे भी नहीं चल सकी।
सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन गई। कांग्रेस विधायक काले झंडे लेकर वेल में पहुंच गए और कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग करने लगे। विपक्ष ने नियम 310 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग उठाई। कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि इतने गंभीर मामले पर सदन में जवाबदेही तय होनी चाहिए, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाए।
हंगामे के कारण प्रश्नकाल में एक भी प्रश्न नहीं हो सका। शून्यकाल में भी सीमित चर्चा हो पाई और विधायक मोहम्मद शहजाद ही अपना प्रश्न रख सके। इस दौरान कांग्रेस विधायकों के 210 का झुमका कहां गिरा नारे ने सदन में राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। यह नारा मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित 210 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों पर विपक्ष के विरोध का हिस्सा था। आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष निकले बिना ही सदन में इस मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली।
कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने मंत्री रेखा आर्या से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। कांग्रेस का कहना था कि मामले में उठे सवालों का जवाब मिलना चाहिए और सरकार को जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं, रेखा आर्या ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के वर्ष 2012 से 2017 के शासनकाल का उल्लेख किया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या ने सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष की ओर से काम रोको प्रस्ताव लाने की मंशा पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप से सदन का माहौल लगातार गर्म बना रहा।
दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध नहीं थमा। कांग्रेस विधायक काले झंडे लेकर फिर वेल में पहुंच गए और मंत्री से जुड़े आरोपों पर जवाब मांगने लगे। सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी चकराता में एक परिवार को कांग्रेस नेताओं की ओर से कथित धमकी दिए जाने का मामला उठाया और जांच कर कार्रवाई की मांग की। इस तरह सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा के बजाय राजनीतिक टकराव हावी रहा। विपक्ष के लगातार विरोध के बीच सरकार ने 7844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पारित करा लिया। इसके साथ ही सदन में कुल 10 विधेयक भी पारित हुए। कांग्रेस ने सत्र की अवधि और सदन में चर्चा के लिए मिले समय पर सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप था कि इतने कम समय में प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर और व्यापक चर्चा संभव नहीं है।
सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद यह सवाल भी अहम हो गया कि क्या सदन की कार्यवाही में जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह मिल पाई। बजट और विधेयकों का पारित होना सरकार के लिए विधायी उपलब्धि रहा, लेकिन प्रश्नकाल का बाधित होना और विपक्ष का लगातार हंगामा विधानसभा की कार्यवाही पर सवाल छोड़ गया। विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गैरसैंण में 231.91 करोड़ रुपये की 12 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें 197.87 करोड़ रुपये की छह योजनाओं का शिलान्यास तथा 34.04 करोड़ रुपये की छह योजनाओं का लोकार्पण शामिल है। इन योजनाओं में पेयजल, सड़क, शिक्षा, सुरक्षा और पुलिस अवस्थापना से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। सरकार ने विकास योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने का संदेश दिया, लेकिन विधानसभा का छोटा सत्र और हंगामे के कारण बाधित कार्यवाही राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बनी रही।

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