
आकांक्षा सिंह एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने अपनी पहचान अपने अथक परिश्रम, कभी न थकने वाले प्रयास और दृढनिश्चय के कारण देश विदेश में एक सफल उद्यमी के तौर पर पहचान बनाई है। बहुत ही प्रतिष्ठित मैगजीन फोर्ब्स में टॉप 30 में उन्हें सम्मिलित किया गया। जो न केवल आकांक्षा और उनके परिवार के लिए बल्कि भारत देश के लिए भी बहुत ही गौरव की बात है। उनकी सफलता हर उस नवयुवक और युवतियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है जो कि एक छोटे से गांव और कस्बों से निकलकर जीवन में कुछ कर दिखाना चाहते हैं।
आकांक्षा अयोध्या, उत्तरप्रदेश के सरियावां पूरे मेढ़ई गांव की रहने वाली हैं। एक ऐसा गांव जहां उन दिनों बिजली की समस्या एक आम बात थी, कहीं भी आने जाने के लिए यातायात के साधनों की कमी थी। मामूली जरूरतों के लिए वहां लोगों को बहुत ही परेशानियों का सामना करना पड़ता था। उत्कृष्ट जीवन जीने के साधन बहुत सीमित थे। इंटरनेट होना तो दिवास्वप्न जैसा था। आकांक्षा बचपन से ही बड़ी बुद्धिमान लड़की थी । परंतु गांव में अच्छे स्कूल की व्यवस्था भी नहीं थी और घर की पारिवारिक आय भी कम थी। परंतु घर में संसाधनों की कमी के होते हुए भी उनके परिवार ने उनकी शिक्षा को प्राथमिकता दी, और उनका एडमिशन साकेत शिक्षा निकेतन, रानीबाजार में कराया। वो प्रारंभ से ही कुशाग्र बुद्धि की छात्रा रहीं। इसके बाद उन्होंने गुरुनानक अकादमी फैजाबाद में एडमिशन लिया। शहर जाकर पढ़ना, आकांक्षा के लिए बहुत ही लाभप्रद साबित हुआ। शहर जाने से उन्होंने न केवल वहां की जिन्दगी को देखा बल्कि उन्हें बहुत कुछ सीखने को भी मिला। इससे भी ज्यादा आकांक्षा ने अपने कजिन जो कि दिल्ली और लखनऊ में रहते थे, उनके पास जाने और मिलने से सीखा। जितना आकांक्षा उनसे मिली , उन्हें उतना महसूस हुआ कि वहां की शैक्षणिक पद्धति में कितना अन्तर है। वहां की शिक्षा पद्धति कितनी विकसित है। वहां पर जीवन कितना सुदृढ़ और अलग है। आकांक्षा ने महसूस किया कि छोटे गांव में जीवन यापन के साधन बड़े शहरों की तुलना में कितने कम है। गांव में जिंदगी जीने के तरीके में शहर की तुलना में जमीं आसमां का अन्तर है, और हर कदम पर शहर में जो सुविधाएं थीं उनकी कमी गांव में थी। यहीं से इनकी जिंदगी ने करवट ली। आकांक्षा को बाहरी जिंदगी देखकर प्रेरणा और आत्मबल मिला। उन्हें शहरी जीवन से बहुत कुछ सकारात्मक सीखने को मिला।
आकांक्षा एक साधारण मध्यम परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने अपने माता पिता को बचपन से ही देखा था कि कैसे घर में संसाधनों की कमी के बावजूद उन लोगों ने आगे बढ़ने की चाह और उम्मीद नहीं छोड़ी। वो हमेशा मेहनत करते थे कि कैसे अपने परिवार को एक अच्छी जिंदगी दे सके। उनके माता पिता के किए गए एक अच्छे और उन्नत जीवन जीने के प्रयास आकांक्षा के लिए प्रेरणादाई थे। विशेषतौर पर उनके पिता ने साइबर कैफे पर जाकर नौकरी के अवसर खोजना, 90 के दशक में एक आम बात नही थी। उनके पिता के किए गए कठिन प्रयासों और मेहनत के फलस्वरूप उन्हें अमेरिका में एक अच्छी नौकरी मिली और यहां से एक बड़ा बदलाव आकांक्षा सिंह की जिंदगी में आया। आकांक्षा का परिवार करीब दो साल के भीतर ही लखनऊ आकर रहने लगा। यहां आने के पश्चात आकांशा ने मॉन्टेसरी स्कूल, कानपुर ब्रांच में एडमिशन लिया। आकांक्षा का गांव से आकर शहर के माहौल में खुद का सामंजस्य बैठना आसान नहीं रहा। लेकिन यहां आकर भी उन्होने चुनौतियों को स्वीकार किया और स्कूल के टॉप स्टूडेंट्स में अपना स्थान बनाया। कुछ ही समय में वो स्कूल की कैप्टन बनी, और स्कूल में बहुत सारे अवार्ड्स भी जीते। आकांक्षा ने वहां ऑल राउंडर ऑफ द ईयर, बेस्ट स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ़ द ईयर, बेस्ट प्रॉमिसिंग पर्सन ऑफ़ द ईयर जैसे कई अवार्ड्स अपने नाम किए। वो उस समय लखनऊ के कई न्यूजपेपर की सुर्खियों में छाई रहीं, जब उन्होंने 10वीं क्लास में 96.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। जो कि लखनऊ शहर के उच्च स्कोर में से एक था। 12वी क्लास में आकांक्षा ने 94 प्रतिशत अंक प्राप्त किए।
स्कूल के पश्चात आकांक्षा अमेरिका चली गई। वहां उन्होंने मिशिगन यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ साइंस में कंप्यूटर साइंस में एडमिशन लिया। वहां भी आकांक्षा यूनिवर्सिटी के 5 प्रतिशत टॉप स्टूडेंट्स में शामिल हुईं। यहां भी अवार्ड्स निरंतर उनको मिलते रहे। उनकी मेहनत और लगन सफलता के नए – नए आयाम स्थापित करती रहीं। आकांक्षा सिंह ने यूनिवर्सिटी की अपनी शिक्षा को कुशाग्र बुद्धि कठिन मेहनत और व्यापक दृष्टिकोण के माध्यम से सफलतापूर्वक सम्पन्न किया।
कॉलेज के दौरान उन्होंने इंटर्न के तौर पर नेक्सटर ऑटोमोटिव और सॉफ्टवेयर इंजीनियर जे पी मॉर्गन एंड चेस शिकागो और न्यूयॉर्क सिटी में यूएसए में 2016 से 2017 के दौरान कार्य किया। ग्रेजुएशन करने के बाद आकांक्षा माइक्रोसॉफ्ट में प्रोग्राम मैनेजर के पद पर माइक्रोसॉफ्ट सेटल, 2018-2022 तक अपना योगदान दिया। इसके बाद 2022 में आकांक्षा प्रोग्राम मैनेजर उबेर, सिएटल, यूएसए में कार्यरत रहीं।
2022 में आकांक्षा ने अपनी अच्छे पैकेज वाली जॉब को छोड़ दिया , और अपने एक मित्र के साथ एक प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। यह प्रोजेक्ट दुनिया के सबसे बड़े उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली कंपनी वाई कॉम्बिनेटर द्वारा मान्य किया गया। ये स्टार्टअप कार्य Y कॉम्बिनेटर फंड 2 प्रतिशत एक्सेप्टेंस रेट पर किया गया।
वाई कॉम्बिनेटर ने केवल अमेरिका और विश्व के नामचीन कंपनियों जैसे Airbnb, Stripe, Zepto, razorpay, जैसी कंपनियों को स्थापित करने में योगदान दिया।
वर्तमान में आकांक्षा का स्टार्टअप जिसका नाम बैकड्रॉप है, विश्व के एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का अपने प्रकार का एक क्रांतिकारी परिवर्तन है। ये प्रोडक्शन को एक प्री अकाउंटिंग टूल प्रदान करता है। जो कि फिल्म, टीवी शोज, व्यवसायिक इवेंट्स को मदद करने में कारगर साबित है। बैकड्रॉप अकाउंटिंग जैसे प्राप्तियां और खर्चों को ट्रैक करने में सहायक होता है। साथ ही अनुमोदन और वित्तीय रिपोर्ट को भी जेनरेट करता है। बैकड्रॉप स्टार्टअप को टेक्रंच ने अपने फेवरेट में शामिल किया है। वाई कॉम्बिनेटर ने बैकड्रॉप को 50 मिलियन डॉलर का सीड फंड ग्रांट दिया।
सबसे सम्मानित बात यह रही कि बैकड्रॉप को फोर्ब्स मैगजीन के टॉप 30 में शामिल किया गया। आकांक्षा सिंह लगातार अपनी कंपनी की ग्रोथ पर ध्यान दे रही हैं। वो चाहती हैं कि उनकी कंपनी विश्व के सभी प्रॉजेक्ट बेस्ड कार्यों के लिए बैकबोन साबित हो। जिससे कंपनियों को कार्य क्षमता में वृद्धि हो । आकांक्षा सिंह जानती हैं कि टेक्नोलॉजी का जीवन में बहुत महत्व है। वो टेक्नोलॉजी को रोजगार से जोड़कर देखती हैं। इसके साथ ही आकांक्षा भारत में भी बूटकैंप की शुरुवात करना चाहती हैं। विशेषतौर पर गांव की महिलाओं के लिए, क्योंकि वो गांव के जीवन से अवगत हैं । वहीं से उन्हें प्रेरणा मिली आगे बढ़ने की ।