प्रशासनिक मकड़जाल में फंसी इन छह गांवों की चकबंदी प्रक्रिया, केवल एक ही कानूनगो नियुक्त; यह है स्थिति

बाजार शुकुल ।छह गांवों में चल रही चकबंदी प्रक्रिया प्रशासनिक मकड़जाल में फंसकर रह गई है। अधिकारियों की काली करतूत यदि देखना हो तो यहां चल रही चकबंदी प्रक्रिया पर एक नजर डालें। यहां वर्तमान में बाहरपुर, काजीपुर, मवैया रहमत गढ़, सेवरा, इक्काताजपूर व दक्खिनगांव राजस्व गांवों में चकबंदी प्रक्रिया संचालित है।

पिछले तीन महीने पहले बाजारशुकुल को प्रथम व द्वितीय दो सर्किलों में विभाजित कर यहां दो सहायक चकबंदी अधिकारी नियुक्त कर दिए गए। इससे पहले यहां मात्र एक ही सहायक चकबंदी अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान था।

छह गांवों में चल रही चकबंदी के सफल संचालन हेतु कम से कम दो कानूनगो होने चाहिए। किंतु यहां मात्र एक ही कानूनगो नियुक्त है।

कभी कभार कार्यालय आते हैं सहायक चकबंदी अधिकारी

इक्काताजपुर व बाहरपुर के लिए सरवन पाठक को और सेवरा, मवैया रहमतगढ़, काजीपुर में ज्ञानेंद्र प्रताप शुक्ल को बतौर सहायक चकबंदी अधिकारी नियुक्त किया गया है। सरवन पाठक कभी कभार कार्यालय आते हैं तो वहीं ज्ञानेंद्र प्रताप शुक्ल का तबादला नगर निगम लखनऊ हो गया है।

दक्खिनगांव ग्राम पंचायत की चकबंदी का काम यहां से 22 किमी दूर स्थित जगदीशपुर के सहायक चकबंदी अधिकारी अंबरीश सिंह देख रहे हैं। काश्तकारों को इतनी दूर जाकर पैरवी करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां कार्यरत रहे सहायक चकबंदी अधिकारी पारसनाथ द्वारा लिखकर यह दिए जाने पर कि वह इस गांव की चकबंदी नहीं कर सकते।

अधिकारियों ने इसकी जिम्मेदारी जगदीशपुर एसीओ को सौंप दी। पिछले कई वर्षों से संचालित चकबंदी प्रक्रिया अभी तक अपने मुकाम को नहीं पा सकी है।

यह है स्थिति

यहां बाहरपुर व मवैया रहमतगढ़ में मालियत लगाने का काम पिछले दो महीने से चल रहा है फिर भी आखिरी अंजाम तक नहीं पहुंचा। काजीपुर में चक काटने की प्रक्रिया शुरू है वह भी लेनदेन की भंवर में उलझी काश्तकारों का आर्थिक दोहन कर रही है। सेवरा और इक्काताजपुर के काश्तकारों ने चकबंदी न कराने का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा है।

दक्खिनगांव की चकबंदी प्रक्रिया भी अधिकारियों के तुगलकी फरमान के आगे घुटने टेक अपने अंतिम पायदान के इंतजार में है।

कहते हैं काश्तकार

काश्तकारों का कहना है कि जब यहां एक ही सहायक चकबंदी अधिकारी कार्यालय था तब ठीक था। अब तो उनका मात्र आर्थिक शोषण किया जा रहा है।

सहायक चकबंदी अधिकारी सरवन पाठक बताते हैं कि क्षेत्र को सर्किल में विभाजन का काम उच्च अधिकारियों का है। इस संबंध में वह क्या कर सकते हैं। बात रही चकबंदी में तेजी लाने की, उस पर काम किया जा रहा है। अभी हाल में ही उनकी यहां नियुक्ति हुई है।

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