चंडीगढ़।किसान संगठनों ने एक बार फिर दिल्ली कूच का फैसला किया है। किसान संगठनों ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के प्रति उदासीनता दिखा रही है जिस कारण फिर से केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोलने का फैसला लिया गया है।
भारती किसान यूनियन एकता सिधूपुर के प्रदेशाध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि संयुक्त किसान मोर्चा और उत्तर भारत के 18 किसान संगठनों के दोनों मंचों से फरवरी के दिनों में दिल्ली की ओर कूच करने का फैसला लिया गया है।
इस दिन होगी कूच करने की तारीख घोषित
दिल्ली की ओर कूच करने की तारीख 2 जनवरी को जंडियाला गुरु और 6 जनवरी को बरनाला में आयोजित होने वाली किसान महापंचायतों में स्पष्ट की जाएगी। डल्लेवाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने बड़े ऐतिहासिक किसान आंदोलन को स्थगित करते समय लिखित वादा किया था कि एमएसपी गारंटी कानून बनाया जाएगा।
आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज की गई एफआइआर रद्द की जाएगी। लखीमपुर खीरी के शहीद किसानों के परिवारों को पूरा न्याय दिया जाएगा और किसानों से चर्चा किए बिना बिजली संशोधन बिल नहीं लाया जाएगा।
सरकार ने नहीं किया वादा पूरा- डल्लेवाल
डल्लेवाल ने आगे कहा कि सरकार ने इनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया है न ही 2014 के चुनाव में किसानों का कर्ज माफ करने और डॉ स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने का वादा पूरा नहीं किया।
वहीं दूसरी ओर बदले की भावना से किसानों के प्रति लापरवाही बरतते हुए कृषि जिंसों पर आयात शुल्क खत्म करने या कम करने की धूर्त रणनीति अपनाकर देश के किसानों को परेशान करने का काम किया जा रहा है।
18 किसान संगठनों ने तैयार किया कार्यक्रम
इन सब पर नाराजगी जताते हुए 18 किसान संगठनों ने यह कार्यक्रम तैयार किया है। बता दें कि इस आंदोलन की तैयारी पिछले कुछ दिनों से विभिन्न राज्यों में बड़ी किसान महापंचायतें कर किसानों को जागरूक करने की तैयारी की जा रही है। इस कार्य को पूरा करने के लिए दक्षिण भारत के 32 गैर राजनीतिक किसान संगठनों से जुड़कर इस आंदोलन में भाग लेने जा रहे हैं।
इसी शृंखला को आगे बढ़ाते हुए 2 जनवरी को जंडियाला गुरु और 6 जनवरी को बरनाला में 22 बड़ी किसान महापंचायतें करने का मिशन आगे बढ़ाया जाएगा। किसान नेता डल्लेवाल ने भी संबंधित जिलों के नेताओं से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की।