चंडीगढ़।गवाह को जानलेवा धमकी देने के छह साल पुराने मामले में अदालत ने अपना फैसला सुनाया है। मामले में जिला अदालत ने गैंगस्टर संपत नेहरा को बरी कर दिया है। उसके खिलाफ सेक्टर-36 थाना पुलिस ने आइपीसी की धारा 195ए और 506 के तहत केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता अपने बयानों से मुकर गया। उसने अदालत में कहा कि उसे संपत का फोन नहीं आया था। ऐसे में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जसप्रीत सिंह ने संपत को बरी कर दिया।
सनसनीवाल ने कोर्ट में दी ये दलील
वहीं संपत का केस लड़ने वाले एडवोकेट रमन सिहाग और नीरज सनसनीवाल ने कोर्ट में दलील दी कि पुलिस ने संपत नेहरा के खिलाफ झूठा केस दर्ज किया था। उसने किसी गवाह को नहीं धमकाया था। शिकायतकर्ता को जिस नंबर से फोन आया था, पुलिस ने उसकी डिटेल ही नहीं निकलवाई।
वहीं अदालत में शिकायतकर्ता आलम ने कहा कि उसने पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी थी। पुलिस के पास उसकी जो शिकायत की कापी थी वह इंग्लिश में थी, लेकिन वह तो अंग्रेजी लिखना जानता ही नहीं है। इसके अलावा उसने कोर्ट में संपत नेहरा को पहचानने से भी मना कर दिया।
ये था पूरा मामला
दर्ज मुकदमे के अनुसार बुड़ैल में होटल चलाने वाले मोहम्मद कलाम उर्फ आलम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आठ दिसंबर 2017 में कुछ लड़कों ने काली शूटर का नाम लेकर उसका अपहरण किया था। आरोपित उसे मोहाली के पास फेंक कर उसकी स्कॉर्पियो लेकर भाग गए।
आरोपितों ने उसे कहा कि दो लाख रुपये देने पर उसकी गाड़ी वापस देंगे। वारदात के एक साल बाद उसे संपत नेहरा का फोन आया और उसने धमकी दी कि अगर वह काली शूटर के खिलाफ गवाही देगा तो वह उसे जान से मरवा देगा।