आबकारी पर वित्त विभाग की आपत्ति से बदला फैसला,
आबकारी विभाग को नीति में संशोधन करना पड़ा
आबकारी विभाग ने 12 प्रतिशत वैट एक्साइज ड्यूटी पर भी लागू करने का निर्णय ले लिया
देहरादून। नए वित्तीय वर्ष की आबकारी नीति को लेकर सरकार भले ही 5060 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व हासिल करने के दावे कर रही थी, लेकिन वित्त वर्ष खत्म होने से 4 माह पहले ही बड़ी बाधा सामने आ गई है। एक्साइज ड्यूटी को वैट से बाहर रखने के फैसले पर वित्त विभाग ने कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद आबकारी विभाग को नीति में संशोधन करना पड़ा। अब एक्साइज ड्यूटी पर भी 12 प्रतिशत वैट लगाया जाएगा, जिसके चलते शराब की कीमत प्रति बोतल 50 से 100 रुपये तक बढ़ गई है।
वित्तीय वर्ष 2025दृ26 की आबकारी नीति में एक्साइज ड्यूटी को वैट के दायरे से बाहर रखा गया था। विभाग का तर्क था कि यह कदम नीति को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी एक्साइज पर वैट नहीं है और वहां दुकानों पर लगाया जाने वाला अधिभार पहले ही हटा दिया गया है। लेकिन वित्त विभाग इस फैसले से सहमत नहीं हुआ। कई दौर की आपत्तियों और स्पष्टीकरणों के बावजूद विभाग ने वैट हटाने पर हामी नहीं भरी, जिसके बाद आबकारी विभाग ने 12 प्रतिशत वैट एक्साइज ड्यूटी पर भी लागू करने का निर्णय ले लिया।
कीमतों में बढ़ोतरी से अब विभाग को बिक्री में गिरावट की आशंका परेशान कर रही है। पर्यटन आधारित राज्य उत्तराखंड में शराब के संतुलित दाम बिक्री को बढ़ाते हैं और तस्करी पर भी नियंत्रण रहता है। लेकिन अब कीमतें बढ़ने से पड़ोसी राज्यों की तुलना में यहां शराब काफी महंगी हो गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि पर्यटक अधिकतम अनुमन्य कोटा लेकर आएंगे, जिससे स्थानीय बिक्री पर सीधा असर पड़ेगा।
राजस्व लक्ष्य को लग सकता है बड़ा झटका
देहरादून। अब तक आबकारी विभाग अनुमान लगा रहा था कि इस बार लक्ष्य से करीब 700 करोड़ रुपये अधिक आय हो सकती है। लेकिन वैट जोड़ने से मात्र 50 करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने की उम्मीद है। इधर, 25 लाख पेटियां बेचने का लक्ष्य अब भी बाकी है। अचानक दाम बढ़ने से जहां उपभोक्ताओं पर 150 करोड़ रुपये का भार बढ़ेगा, वहीं कम मांग की स्थिति में विभाग को लगभग 250 करोड़ रुपये राजस्व में कमी का खतरा दिखाई देने लगा है।
नीति में क्या था बदलाव और क्यों हुआ विवाद
नई आबकारी नीति में एक्साइज ड्यूटी को वैट से मुक्त रखा गया था। आबकारी विभाग का तर्क था कि यह कदम उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों से प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए उठाया गया था, जहाँ एक्साइज पर वैट नहीं है और दुकानों पर अधिभार भी समाप्त कर दिया गया है। लेकिन वित्त विभाग ने इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया। कई दौर की बैठकों और स्पष्टीकरणों के बावजूद वित्त विभाग वैट हटाने को तैयार नहीं हुआ। नतीजतन, मजबूरन आबकारी विभाग को वैट को पुनः लागू करना पड़ा।
कीमतें बढ़ीं, बिक्री घटने का डर
बढ़ी कीमतों का सीधा असर बिक्री पर पड़ने का अनुमान है। पर्यटन-आधारित प्रदेश उत्तराखंड में शराब के संतुलित दाम बिक्री को बढ़ावा देते हैं और तस्करी पर नियंत्रण रखते हैं। अब कीमतें बढ़ने के बाद उत्तराखंड में शराब पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक महंगी हो गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि पर्यटक अधिकतम अनुमन्य कोटा अपने साथ राज्य के बाहर से लाकर खरीद को कम कर सकते हैं। ऐसे हालात में स्थानीय बिक्री प्रभावित होना तय माना जा रहा है। विभाग के सामने अभी भी 25 लाख पेटियों की बिक्री का लक्ष्य अधूरा है। ऐसे में नीति बदलाव से ना सिर्फ सरकार की राजस्व उम्मीदें डगमगा गई हैं, बल्कि बाजार का संतुलन भी बिगड़ने की कगार पर पहुँच गया है।
राजस्व लक्ष्य पर डबल झटका
आबकारी विभाग का अनुमान था कि नए वित्त वर्ष में लक्ष्य से 700 करोड़ रुपये अधिक आय हो सकती है। लेकिन अब स्थिति उलट गई है।
वैट जोड़ने से विभाग को महज 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है।
दूसरी ओर, उपभोक्ताओं पर 150 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय भार पड़ेगा।
यदि कीमतों के कारण मांग घटी, तो राजस्व में लगभग 250 करोड़ रुपये की कमी का खतरा मंडराने लगा है।