अब दुश्मन नहीं ढूंढ पाएंगे सेना के टैंक, हथियार और सैनिकों के ठिकाने- वैज्ञानिकों ने तैयार की यह हैरतअंगेज डिवाइस

कानपुर। जंगल, पहाड़, रेगिस्तान में तैनात भारतीय सेना के टैंक, हथियार और टेंट में ठहरे जवानों को दुश्मन के सेटेलाइट, थर्मल इमेज और श्यता सेंसर आधारित रडार अब नहीं ढूंढ पाएंगे।

रक्षा मंत्रालय के डिफेंस पीएसयू ट्रूप कंफ‌र्ट्स लिमिटेड कंपनी (टीसीएल) की उत्पादन इकाई आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ), हजरतपुर (फिरोजाबाद) ने 18 माह तक चले अनुसंधान के बाद मल्टी स्पेक्ट्रल छलावरण जाल (मल्टी स्पेक्ट्रल कैमोफ्लाज नेट) विकसित कर लिया है।

प्रयोगशालाओं में परीक्षण हुआ सफल

ये उत्पाद सेना द्वारा किए गए परीक्षण में सफल रहा है। छलावरण जाल को महत्वपूर्ण हथियार, सैन्य उपकरण, वाहन और बहुत जरूरी उपकरणों को छिपाने के लिए डिजाइन किया गया है। ये हवाई और जमीन-आधारित इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक (ईएम) सेंसर द्वारा की जाने वाली पहचान की संभावना को कम कर देता है।

डीआरडीओ की चंडीगढ़, जोधपुर सहित अन्य प्रयोगशालाओं में उच्च मानक पर हुए परीक्षण में यह जाल सफल हो चुका है। ओईएफ हजरतपुर के इस उत्पाद के लिए सेना से आर्डर भी मिले हैं। अभी तक आयुध निर्माणी में सामान्य छलावरण जाल बनाए जाते थे।

अब इसे और उन्नत बनाकर मल्टी स्पेक्ट्रल छलावरण जाल में तब्दील किया गया है। टीसीएल के सीएमडी विजय कुमार तिवारी के मुताबिक आयुध निर्माणी द्वारा सेना के लिए उपयोगी उत्पाद बनाना रिसर्च एंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में बड़ी सफलता है।

स्वीडन पर निर्भरता होगी खत्म

छलावरण जाल का आयात अभी तक स्वीडन से होता था लेकिन अब उस पर निर्भरता नहीं रहेगी। रक्षा मंत्रालय की आयुध निर्माणी में फैब्रिक पालीस्टर विशेष कपड़ा और टेलीस्कोपिक पोल के साथ सपोर्ट सिस्टम, टाप पर स्प्रेडर और बेस पर मैटेलिक फुट और नेट स्वैच, विशेष प्रकार के धागे का उपयोग करके मल्टीस्पेक्ट्रल छलावरण जाल बनाया गया है।

उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रदान करने के विशेष सामग्री से बने हैंडबैग के जरिये इसको कहीं भी ले जाना आसान है।सेना अभी तक सामान्य छलावरण जाल का उपयोग करती थी। मैदानी इलाकों में सेटेलाइट, थर्मल इमेज और नाइट विजन से हथियार, टैंक, टेंट की पहचान नाकाम करने वाले मल्टी स्पेक्ट्रल छलावरण जाल पर अनुसंधान करके विकसित किया गया है। सेना और डीआरडीओ के परीक्षण में यह सफल रहा है। अब इसके लिए आर्डर आने शुरू हो गए हैं।-अमित कुमार ¨सह, महाप्रबंधक, ओईएफ, हजरतपुर

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