चंडीगढ़। बर्खास्त पीपीएस अधिकारी राजजीत सिंह हुंदल (Rajjit Hundal) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से राजजीत की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब में नशीले पदार्थों की भारी समस्या है और पुलिस अधिकारी नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों की जांच में सहभागी पाए गए हैं।
भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति का मामला
ध्यान रहे कि इससे पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ा झटका देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। राजजीत के खिलाफ विजिलेंस ने 20 अप्रैल को भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामले में एफआईआर दर्ज की थी वहीं स्पेशल टास्क फोर्स ने ड्रग्स तस्करी का मामला दर्ज किया था। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल हुंदल की ओर से पेश हुए थे।
कॉलेज में दाखिला के लिए बनाया था मृत्यू प्रमाण पत्र
राज्य सरकार की ओर से बीते अप्रैल माह में राजजीत के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। यह मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पूर्व डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की एसआईटी की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज किया गया था। एसटीएफ की ओर से ड्रग्स तस्करी मामले में राजजीत पर दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे। राजजीत सिंह लंबे समय से विवादों में रहा है। सबसे पहले 2013 में वह उस समय विवादों में आया था, जब उसने अपनी बेटी को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलवाने के लिए खुद का ही मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया था।
आतंकवादियों की ओर से मारने का मृत्यु प्रमाण पत्र बनाया था
राजजीत ने खुद को आतंकवादियों की ओर से मारने का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा लिया। हालांकि मामला खुल गया, जिस कारण बेटी को सीट नहीं मिली। राजजीत ने माफी मांगकर अपनी जान छुड़वाई। राजजीत का भेद जून 2017 में तत्कालीन एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू के नेतृत्व में बनी टीम की तरफ से सीआईए इंचार्ज, कपूरथला इंद्रजीत सिंह की 4 किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तारी करने के बाद हुआ था।
एसटीएफ ने जब जांच को आगे बढ़ाया तो पता चला कि 2012 से लेकर 2017 तक जहां-जहां पर राजजीत सिंह की पोस्टिंग हुई, साथ में इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह की भी वहीं पोस्टिंग हुई। राजजीत बाकायदा सिफारिशी पत्र लिख कर इंद्रजीत की अपने साथ पोस्टिंग करवाता था। राजजीत और इंद्रजीत सिंह गुरदासपुर, तरनतारन, मोगा और जालंधर आदि में साथ-साथ पोस्टिंग पर रहे।