बठिंडा। विश्व मानवाधिकार दिवस (World Human Rights Day) के उपलक्ष्य में शनिवार को दल खालसा (Dal Khalsa) की ओर से शहर में एक रोष मार्च किया गया और इसमें जमकर खालिस्तान के पक्ष में नारेबाजी की गई।
इस दौरान पुलिस ने नाकाबंदी करके रोष मार्च रोकने की भी कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस की नाकाबंदी तोड़कर निकल गए। इस मौके पर प्रवक्ताओं ने जम्मू कश्मीर व मणीपुर हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों की ओर से अलग विचार रखने वालों को दबाया जा रहा है।
मानवधिकार का हो रहा हनन
सरकारों के खिलाफ बोलने वालों को बिना किसी जुर्म के जेलों में बंद करके उनके मानवाधिकारों का हनन किया जा रहा है और अल्पसंख्यकों पर लगातार जुल्म किए जा रहे हैं। सैकड़ों की संख्या में सिख बंदी दशकों से जेलों में बंद हैं।

उन्होंने कहा कि बिना किसी मुकद्दमे व बिना किसी अपील-दलील के लंबे समय तक बुद्धिजीवियों, पत्रकारों , सामाजिक कार्यकत्ताओं, लेखकों, विद्यार्थियों को जेलों में बंद करके उनके मानवाधिकारों को कुचला जा रहा है।
एन एस ए के तहत नौजवान जेलों में बंद
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ किसी अदालत में कोई केस नहीं चल रहा लेकिन फिर भी उन्हें जेलों में बंद रखा जा रहा है। पंजाब में भी इसी प्रकार एन.एस.ए. लगातार नौजवानों को प्रदेशों की जेलों में बंद किया गया है। उन्होंने मांग की कि जेलों में बिना किसी कारण के बंद किए गए नौजवानों को जेलों से रिहा किया जाए व देश में फांसी की सजा को पूरी तरह बंद किया जाए।