बाजारों पर ठंड की मार, समय से नहीं खुल रहे बाजार
रुद्रप्रयाग। पिछले लंबे समय से बारिष न होने के कारण जिले में सर्दी सितम ढा रही है। सुबह और सांय के समय लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। स्थिति यह है कि सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पषु भी इसानों के साथ ठंड से बचने के लिए अलाव की खोज कर रहे हैं। ठंड का असर बाजारों पर भी पड़ रहा है। सुबह सात बजे खुलने वाला रुद्रप्रयाग बाजार इन दिनों नौ से दस बजे खुल रहा है।
पहाड़ों में इन दिनों सर्दी कहर ढा रही है। लंबे समय से बारिष न होने के कारण इन दिनों कोरी ठंड बढ़ गई है। ठंड से बचने के लिए सुबह से सांय तक बाजारों में रहने वाले लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं। तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की जनता ठंड अधिक होने के कारण बाजारों का रूख नहीं कर रही है। इस समय बारिष की सख्त आवष्यकता होती है। फसलों के अलावा इंसानों के लिए भी इस समय की बारिष जरूरी है, लेकिन लंबे समय से बारिष नहीं हो पाई है। जिस कारण अब दिक्कतें हो गई हैं। बारिष न होने के कारण ठंड लगातार बढ़ती जा रही है। इसके साथ ही ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होनी चाहिए थी, लेकिन बर्फविहीन पहाड़ियां होने से आग जैसी घटनाएं भी देखने को मिल रही हैं। रुद्रप्रयाग मुख्य बाजार के अलावा सुमाड़ी, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, गुप्तकाषी, ऊखीमठ के बाजारों में भी सर्दी का सितम देखने को मिल रहा है। विष्व अखाड़ा परिषद (गौ रक्षा विभाग) के जिलाध्यक्ष रोहित डिमरी, महामंत्री विमल चौहान, सचिव देवेन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष संदीप कप्रवाण ने कहा कि जिले में कोरी ठंड के कारण आम राहगीरों के साथ ही निराश्रित पषुओं को दिक्कतें हो रही हैं। अलाव के लिए इंसान के साथ ही निराश्रित पषु यहां-वहां भटक रहे हैं। उन्होंने जिला प्रषासन से मांग करते हुए कहा कि नगर पालिका रुद्रप्रयाग के साथ ही नगर पंचायत अगस्त्यमुनि, गुप्तकाषी, ऊखीमठ, तिलवाड़ा के विभिन्न स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जाए, जिससे आम राहगीरों के साथ ही निराश्रित पषुओं को राहत मिल सके। कहा कि नगर पालिका क्षेत्र रुद्रप्रयाग के दो से तीन स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गयी है, जो नाकाफी है। पालिका के अन्य क्षेत्रों में भी अलाव की व्यवस्था की जानी जरूरी है।