देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर से चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शुक्रवार को अंकिता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के आह्वान पर उत्तराखंड महिला मंच, भाकपा माले, सीटू समेत विभिन्न जन सरोकारों से जुड़े संगठनों ने गांधी पार्क के गेट पर प्रदर्शन करते हुए कथित वीआईपी की राज्यपाल की पद पर नियुक्ति होने का विरोध किया है।
संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि 14 अक्टूबर को जब अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट के पास धरने पर बैठे तो पता चला कि जिस कथित वीआईपी का नाम इस केस में सामने आया था, उसे राज्यपाल नियुक्त किया गया है। निर्मला बिष्ट ने बताया कि अंकिता भोगपुर एक रिसोर्ट में रिसेप्शनिस्ट काम करती थी, ये रिसोर्ट सत्तारूढ़ पार्टी भारतीय जनता पार्टी के प्रभावशाली नेता के बेटा का था.उस रिसोर्ट का मालिक एक वीआईपी को स्पेशल सर्विस देने के नाम पर अंकिता से गलत काम करना चाहता था, लेकिन अंकिता ने ऐसा करने से मना क दिया था, जिसके रिसोर्ट के मालिक ने अपने दो कर्मचारियों के साथ मिलकर अंकिता की हत्या कर दी थी, लेकिन सरकार ने उस वीआईपी का नाम दबा दिया, जिसके लिए अंकिता की हत्या की गई और अब सरकार उस कथित वीआईपी को राज्यपाल बनाने जा रही है। ये किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।अंकित भंडारी केस में न्याय की मांग को लेकर मसूरी में भी कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उधर मसूरी में शहर कांग्रेस कमेटी की ओर से एक होटल के सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मंडी परिषद सभापति उपेंद्र थपलियाल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अंकित भंडारी को न्याय दिलाने के बजाय मामले से जुड़े सवालों को दबाने का प्रयास कर रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपेंद्र थापली ने कहा कि अंकित भंडारी प्रकरण में कथित वीआईपी की पहचान और भूमिका को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना चाहिए। उन्होंने कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने की मांग की. साथ ही उसे राज्यपाल बनाने पर भी आपत्ति जताई। उपेंद्र थापली, जसबीर कौर, अमित गुप्ता और महेश चंद ने आरोप लगाया कि अंकित भंडारी के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वहां से हटाया गया और उनके साथ उत्पीड़न किया जा रहा है। एक ओर भाजपा बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर अंकित भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग कर रहे परिवार को इंसाफ नहीं मिल रहा है।