पूर्व मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हीरा सिंह बिष्ट पंचतत्व में विलीन

सीएम धामी ने दी श्रद्धांजलि, राजकीय सम्मान से हुआ अंतिम संस्कार
ईस्ट कैनाल रोड स्थित निजी अस्पताल में ली अंतिम सांस 
ऐतिहासिक डी.ए.वी. पीजी कॉलेज की छात्र राजनीति से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर 
देहरादून।  पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेता हीरा सिंह बिष्ट पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर धामी उनके सेवक आश्रम रोड स्थित आवास पर पहुंचे और पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर उन्होंने शोक संतृप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की।  वे 82 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति, श्रमिक आंदोलन और सामाजिक जीवन में शोक की लहर दौड़ गई। विभिन्न राजनीतिक दलों, श्रमिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने उनके निधन को राज्य के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक सफर देहरादून के ऐतिहासिक डी.ए.वी. (पीजी) कॉलेज की छात्र राजनीति से शुरू हुआ। छात्र जीवन में ही उन्होंने अपने प्रभावशाली नेतृत्व और संगठन क्षमता के बल पर अलग पहचान बनाई। इसके बाद वे कांग्रेस संगठन और ट्रेड यूनियन आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने एक जुझारू, सरल और जनसरोकारों से जुड़े नेता की छवि कायम रखी।
उनका राजनीतिक जीवन 1977 के आम चुनाव से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। आपातकाल के बाद पूरे उत्तर भारत में कांग्रेस विरोधी लहर के बीच पार्टी ने उन्हें टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कड़ा मुकाबला किया। वे भारतीय लोक दल के उम्मीदवार परिपूर्णानंद पैन्यूली से बेहद मामूली अंतर से पराजित हुए। उस समय अविभाजित उत्तर प्रदेश में वे सबसे कम मतों के अंतर से हारने वाले कांग्रेस प्रत्याशी रहे, जिसकी व्यापक चर्चा हुई।
जानकारी के मुताबिक, बीती रात करीब डेढ़ बजे हीरा सिंह बिष्ट के सीने में दर्द की शिकायत हुई थी। इसके बाद उन्हें उनके परिजन ईस्ट कैनाल रोड स्थित एक निजी अस्पताल ले गए। जहां उनका निधन हो गया। ये भी बताया जा रहा है कि वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे। उनके निधन के बाद पूरे कांग्रेस और प्रदेशभर में शोक की लहर दौड़ गई। वे सेवक आश्रम रोड पर स्थित मकान में रहते थे।
बता दें कि हीरा सिंह बिष्ट जमीनी स्तर के नेता के तौर पर जाने जाते थे। उन्होंने अपने जीवन काल में श्रमिकों और मलिन बस्ती वासियों के हितों को लेकर आवास मुखर किया। उनके लिए लगातार संघर्ष किया। एनडी तिवारी सरकार में वे परिवहन श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
श्रमिकों के हितों के लिए किया था संघर्ष
हीरा सिंह बिष्ट ने लंबे समय तक इंटक के कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार भी संभाला और श्रमिकों के हितों के लिए लगातार संघर्ष भी किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय तक अपनी सक्रिय भूमिका भी निभाई। वहीं, हीरा सिंह बिष्ट के अंतिम दर्शनों के लिए पक्ष हो या फिर विपक्ष के तमाम नेता, राज्य आंदोलनकारी समाजसेवी उनके आवास पर पहुंचे और श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
हीरा सिंह बिष्ट के लोक सेवा और जनकल्याण कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगेः धामी 
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट के आवास पर पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। लोक सेवा और जनकल्याण के प्रति आपके कार्य सदैव स्मरणीय रहेंगे। खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लेकर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कैबिनेट मंत्री खजान दास, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। वहीं, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने हीरा सिंह बिष्ट के निधन को प्रदेश के लिए बहुत बड़ी क्षति बताया है। कैबिनेट मंत्री खजान दास ने हीरा सिंह बिष्ट के निधन को प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि दिवगंत हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक चरित्र हमेशा मिलनसार रहा, उनका व्यवहार दल से ऊपर था। इसलिए वे सरल स्वभाव के व्यक्तित्व वाले जन प्रिय नेता थे।?
कांग्रेस परिवार के लिए अपूर्णनीय क्षतिः गोदियाल 
देहरादून। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि उनका इस प्रकार से इस दुनिया से चले जाना कांग्रेस परिवार के लिए अपूर्णनीय क्षति तो है, साथ ही संपूर्ण उत्तराखंड के लिए भी अपूरणीय क्षति है। श्रम जगत में उनके किए गए कामों को कोई नहीं भूल सकता है, श्रमिकों के हितों के लिए किए गए उनके कामों को हमेशा याद रखा जाएगा। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड की विधानसभा में उन्होंने क्षेत्रीय हितों का पक्ष रखा था, उत्तराखंड के प्रमुख हितैषी पक्षकार नेता का ना रहना बहुत दुखदाई है।

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