सर्वे टीम को रेस्क्यू करने के लिए आईटीबीपी जुटी
मुनस्यारी तहसील मुख्यालय से करीब 74 किलोमीटर दूर भारत-चीन दुंग से टोपीढुंगा मार्ग पर है कर्मचारी
लगातार बर्फ गिरने से रास्ता बंद हो गया और चारों लोग ओल्ड दुंग इलाके में ही फंसकर रह गए
देहरादून। भारत-चीन सीमा से सटे इलाके ओल्ड दुंग में सड़क सर्वे के लिए गई चार सदस्य टीम भारी बर्फबारी के कारण फंस गई है, जिनको बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। चार सदस्य टीम बीती 25 सितंबर से वहां फंसी हुई है। फिलहाल उनके खाने-पीने की पूरी व्यवस्था है, लेकिन टीम समय से नीचे नहीं आ पाई है।
मुनस्यारी तहसील मुख्यालय से करीब 74 किलोमीटर दूर भारत-चीन दुंग से टोपीढुंगा मार्ग के निरीक्षण के लिए वन विभाग के कर्मचारी रमेश सिंह राणा, बीआरओ कर्मचारी और दो पोर्टर उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहुंचे थे। 25 सितंबर को अचानक मौसम खराब होने के साथ भारी बर्फबारी शुरू हो गई। लगातार बर्फ गिरने से रास्ता बंद हो गया और चारों लोग ओल्ड दुंग इलाके में ही फंसकर रह गए, तभी से टीम को सुरक्षित वापस लाने के लिए प्रयास किए जा रहे है।
फंसी हुई सर्वे टीम को मुनस्यारी तक सुरक्षित लाने के लिए आईटीबीपी ने अब रेस्क्यू अभियान तेज कर दिया है। आईटीबीपी मिलम पोस्ट के अधिकारियों के मुताबिक दुंग और मिलम दोनों छोर से जवान भारी बर्फ हटाकर रास्ता खोलने में जुटे हैं। जवान बर्फ काटकर आवाजाही लायक रास्ता तैयार कर रहे हैं। ताकि ओल्ड दुंग में फंसी टीम को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
ऊंचाई वाले इलाके में लगातार खराब मौसम और जमा बर्फ के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। वन क्षेत्राधिकारी लवराज सिंह पांगती के कि माने तो ओल्ड दुंग में सेना के जवानों ने फंसे लोगों के रहने खाने और पानी की व्यवस्था की है। फिलहाल सेना की ओर से टीम के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ आईटीबीपी जवान रास्ता खोलने में जुटे हैं ताकि मौसम में सुधार और मार्ग खुलने के बाद टीम को सुरक्षित तरीके से नीचे लाया जा सके।
उधर रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर भी यात्रियों की सुरक्षा को लेकर एसडीआरएफ ने मोर्चा संभाला हुआ है। 29 सितंबर को गौरीकुंड केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीड़बासा हेलीपैड के पास स्थित स्लाइडिंग जोन में लगातार यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रही।
सोनप्रयाग पोस्ट से उप निरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में जवानों ने लैंडस्लाइड प्रभावित हिस्से में मोर्चा संभालते हुए यात्रियों को सुरक्षित तरीके से रास्ता पार कराया। एसडीआरएफ के मुताबिक अभियान के दौरान करीब 9 हजार यात्रियों को सुरक्षित तरीके से चीड़बासा स्लाइडिंग जोन के आरपार कराया गया। प्रभावित रास्ते और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जवानों ने यात्रियों की आवाजाही पर लगातार नजर बनाए रखी। इससे पहले भी चीड़बासा स्लाइडिंग जोन में यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए एसडीआरएफ की ओर से लगातार राहत और रेस्क्यू अभियान चलाया जाता रहा है।
केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक पर गए पांचों ट्रेकर सुरक्षित, हुआ संपर्क
रुद्रप्रयाग। बुधवार को केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक रूट पर गए पांच ट्रेकरों से पांच दिन बाद परिजनों का संपर्क हो गया है। सभी ट्रेकर सुरक्षित हैं और गंगी-घुत्तू (टिहरी) की ओर से निकल गए हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) रुद्रप्रयाग को 25 सितंबर से ट्रेकिंग दल के सदस्यों से संपर्क नहीं होने की सूचना मिली थी।
डीईओसी के अनुसार यशवंत सिंह चौहान ने सूचना दी थी कि उनके भाई प्रवेश चौहान पांच साथियों के साथ केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक पर गए थे। दल की आगे ऑडिन कोल ट्रेक के माध्यम से गंगोत्री जाने की योजना थी। संपर्क नहीं होने पर परिजनों ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को इसकी सूचना दी।सूचना मिलते ही डीईओसी ने पुलिस नियंत्रण कक्ष रुद्रप्रयाग और प्रभागीय वनाधिकारी, वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर को मामले से अवगत कराया। साथ ही 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार और रुद्रप्रयाग से समन्वय स्थापित कर ट्रेकिंग दल के संबंध में जानकारी जुटाई गई।
डीईओसी ने बुधवार 30 सितंबर को सुबह 11.45 बजे सूचना देने वाले यशवंत चौहान से दोबारा संपर्क किया। उन्होंने बताया कि सभी पांच ट्रेकरों से संपर्क हो गया है और वे सुरक्षित हैं। सभी ट्रेकर गंगी-घुत्तू (टिहरी) की ओर से निकल गए हैं। इसके बाद परिजनों और प्रशासन ने राहत की सांस ली।