केदारनाथ रोपवे पर स्थानीय हितों की बड़ी पहल, पीएम को भेजा जन-निवेदन

आजीविका संरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में भी दायर होगी जनहित याचिका
रुद्रप्रयाग। केदारनाथ रोपवे परियोजना को लेकर केदारघाटी में स्थानीय हितों, पारदर्शिता और आजीविका संरक्षण की मांग अब संगठित रूप से सामने आने लगी है। केदारघाटी के संभावित प्रभावित नागरिकों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विस्तृत जन-निवेदन भेजा गया है, जिसमें रोपवे परियोजना का विरोध नहीं, बल्कि विकास के साथ स्थानीय लोगों के अधिकारों, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही रोपवे परियोजना से प्रभावित होने वाले लोगों की आजीविका की रक्षा के उद्देश्य से माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर किए जाने की भी तैयारी चल रही है।
जन-निवेदन में कहा गया है कि बाबा केदार की पावन धरती पूरे देश की आस्था का केंद्र है और केंद्र सरकार द्वारा केदारनाथ धाम के विकास के लिए किए जा रहे प्रयास स्वागत योग्य हैं। किंतु विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें स्थानीय नागरिकों की भागीदारी, सम्मान और आजीविका सुरक्षित रहे।
पत्र में कहा गया है कि केदारघाटी के हजारों परिवार वर्षों से तीर्थयात्रा आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर हैं। घोड़ा-खच्चर संचालक, डंडी-कंडी एवं पिट्ठू श्रमिक, स्थानीय टैक्सी एवं व्यावसायिक वाहन चालक, होटल व्यवसायी, दुकानदार, तीर्थ पुरोहित, व्यापारी तथा पर्यटन से जुड़े अनेक लोग इस परियोजना से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए परियोजना का लाभ सबसे पहले स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए।
जन-निवेदन में प्रधानमंत्री से मांग की गई है कि केदारनाथ रोपवे परियोजना की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, अंतिम रूट, स्टेशन, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभाव आकलन, पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार नीति सार्वजनिक कर पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा केदारघाटी में 100 से 150 बेड का आधुनिक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करने, एमएसएमई आधारित औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने, प्रभावित परिवारों का सामाजिक एवं आर्थिक सर्वेक्षण कराने तथा पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की स्पष्ट नीति बनाने की मांग भी की गई है।
जन-निवेदन में रोपवे परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रखरखाव में कम से कम 90 प्रतिशत रोजगार स्थानीय युवाओं को देने, स्थानीय पूर्व सैनिकों, इंजीनियरिंग डिग्री एवं डिप्लोमा धारक युवाओं को प्राथमिकता प्रदान करने तथा परियोजना से जुड़े परिवहन, होटल, पार्किंग, टिकटिंग, हाउसकीपिंग, सुरक्षा, गाइड सेवा, लॉजिस्टिक्स, खान-पान, स्मारिका केंद्र और अन्य सभी व्यावसायिक गतिविधियों में स्थानीय लोगों, स्वयं सहायता समूहों एवं स्थानीय उद्यमियों को प्राथमिकता देने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
इसके अतिरिक्त परियोजना से जुड़े ठेका कार्यों एवं सेवा प्रदायगी में स्थानीय पंजीकृत ठेकेदारों को प्राथमिकता देने, प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों, तीर्थ पुरोहितों, व्यापारियों और प्रभावित परिवारों से व्यापक संवाद करने तथा परियोजना की निगरानी के लिए प्रशासन, विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और परियोजना प्रबंधन की संयुक्त समन्वय समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है।
जन-निवेदन के प्रेषक सामाजिक कार्यकर्ता त्रिभुवन चौहान ने बताया कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि रोपवे परियोजना के कारण स्थानीय लोगों की आजीविका प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से रोपवे परियोजना एवं स्थानीय रोजगार के मुद्दे पर माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी भी अंतिम चरण में है, ताकि विकास और स्थानीय हितों के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।
जन-निवेदन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री उत्तराखंड, मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (पर्यटन), गढ़वाल आयुक्त, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग, मुख्य विकास अधिकारी, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद तथा केदारनाथ रोपवे परियोजना से जुड़ी कंपनी को भी प्रेषित की गई है।

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